श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.32.37 
ततस्तु वैतहव्यानां वधाय स महीपति:।
पुत्रं प्रस्थापयामास प्रतर्दनमरिंदमम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद राजा ने अपने पुत्र शत्रुदमन प्रतर्दन को वीतहव्य के पुत्रों को मारने के लिए भेजा।
 
After this the king sent his son Shatrudaman Pratardana to kill the sons of Vitahavya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)