श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.32.36 
ततोऽसौ यौवराज्ये च स्थापयित्वा प्रतर्दनम्।
कृतकृत्यं तदाऽऽत्मानं स राजा अभ्यनन्दत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा दिवोदास ने प्रतर्दन को युवराज बनाकर अपने को संतुष्ट माना और महान् आनन्द का अनुभव किया ॥36॥
 
Thereafter, King Divodas considered himself gratified by appointing Pratardan as the crown prince and experienced great joy. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)