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mahabharat 13.32.31: भरत! जन्म लेते ही वह इतना बड़ा हो गया कि तुरन्त ही तेरह वर्ष का बालक सा दिखने लगा। साथ ही उसने अपने मुख से सम्पूर्ण वेद और धनुर्वेद का पाठ किया॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.32.31 
स जातमात्रो ववृधे समा: सद्यस्त्रयोदश।
वेदं चापि जगौ कृत्स्नं धनुर्वेदं च भारत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भरत! जन्म लेते ही वह इतना बड़ा हो गया कि तुरन्त ही तेरह वर्ष का बालक सा दिखने लगा। साथ ही उसने अपने मुख से सम्पूर्ण वेद और धनुर्वेद का पाठ किया॥31॥
 
Bharata! As soon as he was born he grew so much that he immediately started looking like a thirteen year old. At the same time he recited the entire Vedas and Dhanurveda with his mouth.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)