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mahabharat 13.32.3: मैंने यह भी सुना है कि राजा वीतहव्य क्षत्रिय से ब्राह्मण बन गए थे। हे गंगानंदन! अब मैं पहले वह प्रसंग सुनना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.32.3 
वीतहव्यश्च नृपति: श्रुतो मे विप्रतां गत:।
तदेव तावद् गाङ्गेय श्रोतुमिच्छाम्यहं विभो॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मैंने यह भी सुना है कि राजा वीतहव्य क्षत्रिय से ब्राह्मण बन गए थे। हे गंगानंदन! अब मैं पहले वह प्रसंग सुनना चाहता हूँ।
 
I have also heard that King Vitahavya had become a Brahmin from a Kshatriya. O Lord Ganganandan! Now I want to listen to that incident first.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)