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mahabharat 13.32.14: पुण्यशाली काशीनन्दन सुदेव धर्मपूर्वक पृथ्वी का पालन करने लगे, इतने में ही वीथव्य के समस्त पुत्रों ने उन पर आक्रमण करके उन्हें युद्ध में परास्त कर दिया ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.32.14 
स पालयामास महीं धर्मात्मा काशिनन्दन:।
तैर्वीतहव्यैरागत्य युधि सर्वैर्विनिर्जित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पुण्यशाली काशीनन्दन सुदेव धर्मपूर्वक पृथ्वी का पालन करने लगे, इतने में ही वीथव्य के समस्त पुत्रों ने उन पर आक्रमण करके उन्हें युद्ध में परास्त कर दिया ॥14॥
 
The virtuous Kashinandan Sudev started following the earth religiously. Meanwhile, all the sons of Veethavya attacked and defeated them in the war. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)