मतङ्ग परमं स्थानं वार्यमाणोऽसकृन्मया।
चिकीर्षस्येव तपसा सर्वथा न भविष्यसि॥ ५॥
अनुवाद
‘मतंग! मैंने तुम्हें बार-बार सावधान किया है, फिर भी तुम तपस्या द्वारा उस महान् स्थान को प्राप्त करने की इच्छा रखते हो। ऐसा करने से तुम्हारी शक्ति सर्वथा नष्ट हो जाएगी।॥5॥
‘Matang! I have repeatedly warned you against it, but you still keep wishing to attain that great place through austerity. By doing so, your power will be completely destroyed.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥