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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना
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श्लोक 14
श्लोक
13.30.14
तदेवं शोकहर्षौ तु कामद्वेषौ च पुत्रक।
अतिमानातिवादौ च प्रविशेते द्विजाधमम्॥ १४॥
अनुवाद
बेटा! इस प्रकार शोक-सुख, राग-द्वेष, अभिमान और अतिशय आदि विकार अधम द्विज के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं॥14॥
Son! In this way the vices like grief-joy, attachment-hatred, pride and extremism etc. enter inside the Adham Dwija. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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