हरिश्चंद्र के उस यज्ञ में विश्वामित्र ने अपने पराक्रम से देवताओं को संतुष्ट करके शुनःशेप को मुक्त कर दिया था; इसीलिए उसने बुद्धिमान विश्वामित्र के पुत्र का पद प्राप्त किया था ॥7॥
In that yagya of Harishchandra, Vishwamitra had freed Shunashep by satisfying the gods with his might; That's why he attained the status of son of wise Vishwamitra. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥