स्थाने मतङ्गो ब्राह्मण्यं नालभद् भरतर्षभ।
चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमाप्तवान्॥ १९॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! चाण्डाल योनि में जन्म लेने के कारण मतंग का ब्राह्मणत्व प्राप्त न होना उचित ही था। परन्तु विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व कैसे प्राप्त हुआ? ॥19॥
O best of the Bharatas! It was justified that Matanga did not attain brahminhood because he was born as a Chandala. But how did Vishwamitra attain brahminhood? ॥19॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विश्वामित्रोपाख्याने तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विश्वामित्रका उपाख्यानविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥