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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत
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श्लोक 27
श्लोक
13.29.27
भीष्म उवाच
एतत् श्रुत्वा तु वचनं तमुवाच पुरंदर:।
मतङ्ग दुर्लभमिदं विप्रत्वं प्रार्थ्यते त्वया॥ २७॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - भरत ! मतंग की यह बात सुनकर इन्द्रदेव ने कहा - 'मतंग ! तुम जिस ब्राह्मणत्व की माँग कर रहे हो, वह तुम्हारे लिए दुर्लभ है।'॥27॥
Bhishmaji says - Bharata! On hearing this from Matang, Indradev said - 'Matang! The brahminhood that you are asking for is rare for you.'॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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