Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.92: जो गंगाजी क्षमा, रक्षा और धारण करने में पृथ्वी के समान हैं, तथा जो अग्नि और सूर्य के समान शोभायमान हैं, वे ब्राह्मण जाति पर सदैव कृपा करने के कारण सुब्रह्मण्य कार्तिकेय और ब्राह्मणों को भी प्रिय और पूज्य हैं॥92॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षान्त्या मह्या गोपने धारणे च
दीप्त्या कृशानोस्तपनस्य चैव।
तुल्या गङ्गा सम्मता ब्राह्मणानां
गुहस्य ब्रह्मण्यतया च नित्यम्॥ ९२॥
अनुवाद
जो गंगाजी क्षमा, रक्षा और धारण करने में पृथ्वी के समान हैं, तथा जो अग्नि और सूर्य के समान शोभायमान हैं, वे ब्राह्मण जाति पर सदैव कृपा करने के कारण सुब्रह्मण्य कार्तिकेय और ब्राह्मणों को भी प्रिय और पूज्य हैं॥92॥
Gangaji, who is equal to the earth in terms of forgiveness, protection and bearing, and who is as beautiful as fire and the sun in brightness, is dear and respected by Subrahmanya Kartikeya and the Brahmins also because of her always showering blessings on the Brahmin caste. 92॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥