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mahabharat 13.28.84: गंगाजी ऊर्जावान, परम पुण्यमयी, मधुर जल से परिपूर्ण हैं और पृथ्वी, आकाश और पाताल तीनों मार्गों पर विचरण करती हैं। जिन्होंने तीनों लोकों की रक्षक गंगाजी की शरण ली है, वे स्वर्ग को गए हैं॥84॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.28.84 
ऊर्जावतीं महापुण्यां मधुमतीं त्रिवर्त्मगाम्।
त्रिलोकगोप्त्रीं ये गङ्गां संश्रितास्ते दिवं गता:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
गंगाजी ऊर्जावान, परम पुण्यमयी, मधुर जल से परिपूर्ण हैं और पृथ्वी, आकाश और पाताल तीनों मार्गों पर विचरण करती हैं। जिन्होंने तीनों लोकों की रक्षक गंगाजी की शरण ली है, वे स्वर्ग को गए हैं॥84॥
 
Gangaji is energetic, most virtuous, full of sweet water and roams on the three paths of earth, sky and underworld. Those who have taken refuge in Gangaji, the protector of the three worlds, have gone to heaven. 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)