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mahabharat 13.28.81: जो मनुष्य वायु के वेग से बहुत ऊँची उठने वाली, परम सुन्दर और तेजस्वी गंगाजी की लहरों में स्नान करते हैं, वे परलोक में सूर्य के समान तेजस्वी हो जाते हैं ॥81॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  13.28.81 
वाय्वीरिताभि: सुमनोहराभि-
द्रुताभिरत्यर्थसमुत्थिताभि:।
गङ्गोर्मिभिर्भानुमतीभिरिद्धा:
सहस्ररश्मिप्रतिमा भवन्ति॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वायु के वेग से बहुत ऊँची उठने वाली, परम सुन्दर और तेजस्वी गंगाजी की लहरों में स्नान करते हैं, वे परलोक में सूर्य के समान तेजस्वी हो जाते हैं ॥81॥
 
Those who bathe in the most beautiful and lustrous waves of the Ganges, which rise very high with great force driven by the wind, become as radiant as the Sun in the next world. ॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)