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य इच्छेत् सफलं जन्म जीवितं श्रुतमेव च।
स पितॄंस्तर्पयेद् गाङ्गमभिगम्य सुरांस्तथा॥ ६५॥
अनुवाद
जो मनुष्य अपने जन्म, जीवन और वेदों के अध्ययन को सफल बनाना चाहता है, उसे चाहिए कि वह गंगा में जाकर उसका जल देवताओं और पितरों को अर्पित करे ॥ 65॥
One who wishes to make his birth, life and study of the Vedas successful should go to the Ganges and offer its water to the gods and forefathers. ॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥