Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.60: गंगाजी के तट पर निवास करने से मनुष्यों को जो परम प्रेम और अतुलनीय आनंद प्राप्त होता है, वह स्वर्ग में निवास करने वाले और समस्त सुखों को भोगने वाले मनुष्य को भी प्राप्त नहीं हो सकता ॥60॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न सा प्रीतिर्दिविष्ठस्य सर्वकामानुपाश्नत:।
सम्भवेद् या परा प्रीतिर्गङ्गाया: पुलिने नृणाम्॥ ६०॥
अनुवाद
गंगाजी के तट पर निवास करने से मनुष्यों को जो परम प्रेम और अतुलनीय आनंद प्राप्त होता है, वह स्वर्ग में निवास करने वाले और समस्त सुखों को भोगने वाले मनुष्य को भी प्राप्त नहीं हो सकता ॥60॥
The supreme love and incomparable bliss that men get by living on the banks of river Ganga cannot be obtained even by a person living in heaven and experiencing all the pleasures. ॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥