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mahabharat 13.28.56: गंगा की लहरों में भीगकर बहने वाली वायु जब मनुष्य के शरीर का स्पर्श करती है, तो उसके समस्त पापों का तुरन्त नाश कर देती है ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.28.56 
गङ्गोर्मिभिरथो दिग्ध: पुरुषं पवनो यदा।
स्पृशते सोऽस्य पाप्मानं सद्य एवापकर्षति॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
गंगा की लहरों में भीगकर बहने वाली वायु जब मनुष्य के शरीर का स्पर्श करती है, तो उसके समस्त पापों का तुरन्त नाश कर देती है ॥ 56॥
 
When the air flowing after being soaked in the waves of the Ganges touches the body of a human being, it instantly destroys all his sins. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)