Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.48: विप्रवर! विनय और सदाचार से रहित, दुष्ट कर्म करने वाले नीच मनुष्य भी गंगाजी की शरण में आकर कल्याण स्वरूप हो जाते हैं॥48॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विनयाचारहीनाश्च अशिवाश्च नराधमा:।
ते भवन्ति शिवा विप्र ये वै गङ्गामुपाश्रिता:॥ ४८॥
अनुवाद
विप्रवर! विनय और सदाचार से रहित, दुष्ट कर्म करने वाले नीच मनुष्य भी गंगाजी की शरण में आकर कल्याण स्वरूप हो जाते हैं॥48॥
Vipravara! Even evil-doing lowly people who are devoid of modesty and good conduct, become an embodiment of well-being when they take refuge in Gangaji. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥