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mahabharat 13.28.38: जो मनुष्य सूर्य की किरणों से तप्त हुआ गंगाजल पीता है, उसका वह जल पीना गोबर से बने जौ के दलिया खाने से भी अधिक पवित्र करने वाला है। 38.   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.28.38 
यस्तु सूर्येण निष्टप्तं गाङ्गेयं पिबते जलम्।
गवां निर्हारनिर्मुक्ताद् यावकात् तद् विशिष्यते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सूर्य की किरणों से तप्त हुआ गंगाजल पीता है, उसका वह जल पीना गोबर से बने जौ के दलिया खाने से भी अधिक पवित्र करने वाला है। 38.
 
The person who drinks the water of the Ganges heated by the rays of the sun, his drink of that water is more purifying than eating barley porridge made from cow dung. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)