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mahabharat 13.28.30: जो मनुष्य अपने जीवन के प्रारम्भ में पाप करके फिर गंगा नदी की पूजा करने लगते हैं, वे भी उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.28.30 
पूर्वे वयसि कर्माणि कृत्वा पापानि ये नरा:।
पश्चाद् गङ्गां निषेवन्ते तेऽपि यान्त्युत्तमां गतिम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने जीवन के प्रारम्भ में पाप करके फिर गंगा नदी की पूजा करने लगते हैं, वे भी उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥30॥
 
Those human beings who commit sins in the early stages of their lives and then start worshipping the river Ganga, also attain the best destination. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)