ते पूजिता: सुखासीना: कथाश्चक्रुर्महर्षय:॥ १०॥
भीष्माश्रिता: सुमधुरा: सर्वेन्द्रियमनोहरा:।
अनुवाद
पूजन के पश्चात् महर्षि सुखपूर्वक बैठकर भीष्मजी से सम्बन्धित मधुर एवं सुन्दर कथाएँ सुनाने लगे। उनकी वे कथाएँ समस्त इन्द्रियों और मन को मोहित करने वाली थीं। 10 1/2॥
After the worship, the great sage sat comfortably and started telling sweet and beautiful stories related to Bhishmaji. Those stories of his captivated all the senses and mind. 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥