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इदं यश्चापि शृणुयाद् रहस्यं त्वङ्गिरोमतम्।
उत्तमे च कुले जन्म लभेज्जातीश्च संस्मरेत्॥ ७१॥
अनुवाद
जो मनुष्य अंगिरा ऋषि के इस रहस्यमय उपदेश को सुनता है, वह उच्च कुल में जन्म लेता है और उसे अपने पूर्वजन्मों की स्मृतियाँ स्मरण हो आती हैं।
He who listens to this mysterious teaching of the sage Angira is born in an exalted family and remembers the memories of his previous births. 71.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि आङ्गिरसतीर्थयात्रायां पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें आङ्गिरसतीर्थयात्राविषयक पच्चीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २५ ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥