श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  13.27.67 
इदं मेध्यमिदं पुण्यमिदं स्वर्ग्यमनुत्तमम्।
इदं रहस्यं वेदानामाप्लाव्यं पावनं तथा॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
यह तीर्थ-कार्य परम पवित्र, पुण्यमय, स्वर्ग प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन और वेदों का रहस्य है। प्रत्येक तीर्थ पवित्र और स्नान करने योग्य है।
 
This work of pilgrimage is most sacred, virtuous, the best means to attain heaven and the secret of the Vedas. Every pilgrimage is sacred and worthy of bathing.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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