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श्लोक 13.27.59  |
मैनाके पर्वते स्नात्वा तथा संध्यामुपास्य च।
कामं जित्वा च वै मासं सर्वयज्ञफलं लभेत्॥ ५९॥ |
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| अनुवाद |
| मैनाक पर्वत पर एक मास तक स्नान और संध्यावन्दन करने से मनुष्य काम पर विजय प्राप्त कर लेता है और समस्त यज्ञों का फल प्राप्त करता है ॥59॥ |
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| By bathing and performing evening prayers on the Mainak mountain for a month, a man conquers lust and obtains the fruits of all sacrifices. ॥ 59॥ |
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