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तथा ब्रह्मसरो गत्वा धर्मारण्योपशोभितम्।
पुण्डरीकमवाप्नोति उपस्पृश्य नर: शुचि:॥ ५८॥
अनुवाद
पवित्र भूमि से सुशोभित ब्रह्मसर तीर्थ में जाकर वहाँ स्नान करने से पवित्र हुआ मनुष्य पुण्डरीक यज्ञ का फल प्राप्त करता है। 58.
By going to the Brahmasar Tirtha, adorned with the sacred ground and taking a bath there, a man who becomes pure gets the fruits of the Pundarik Yagya. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥