Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.27.57: जो मनुष्य पिण्डारक तीर्थ में स्नान करके वहाँ रात्रि निवास करता है, वह प्रातःकाल पवित्र हो जाता है और अग्निष्टोमय यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥57॥ | mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य पिण्डारक तीर्थ में स्नान करके वहाँ रात्रि निवास करता है, वह प्रातःकाल पवित्र हो जाता है और अग्निष्टोमय यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥57॥
A person who takes a bath in the Pindarak Tirtha and stays there for a night becomes pure in the morning and obtains the fruits of the Agnishtomaya Yagna. ॥57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥