Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.27.42: प्रथम तो गया में अश्मप्रथ (प्रेतशिला) पर पितरों को पिण्ड देने से, दूसरा निर्विन्द पर्वत पर पिण्ड देने से तथा तीसरा क्रौंचपदी नामक तीर्थ में पिण्ड देने से मनुष्य ब्रह्महत्या दूर होकर पूर्णतः शुद्ध हो जाता है ॥42॥ | mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्मपृष्ठे गयायां च निरविन्दे च पर्वते।
तृतीयां क्रौञ्चपद्यां च ब्रह्महत्यां विशुध्यते॥ ४२॥
अनुवाद
प्रथम तो गया में अश्मप्रथ (प्रेतशिला) पर पितरों को पिण्ड देने से, दूसरा निर्विन्द पर्वत पर पिण्ड देने से तथा तीसरा क्रौंचपदी नामक तीर्थ में पिण्ड देने से मनुष्य ब्रह्महत्या दूर होकर पूर्णतः शुद्ध हो जाता है ॥42॥
First, by offering the Pinda to the ancestors on Ashmapratha (Pretshila) in Gaya, second by offering the Pinda on Nirvind mountain and third by offering the Pinda in the pilgrimage named Kraunchapadi, a person becomes completely pure by removing the Brahmahatya. 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥