Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.27.32-33: जो मतंगवापी तीर्थ में स्नान करता है, वह एक ही रात्रि में सिद्धि प्राप्त कर लेता है। जो अनलम्ब, अंधक और सनातन तीर्थ में स्नान करके नैमिषारण्य नामक स्वर्ग में स्नान करके इन्द्रियों का संयम करके एक मास तक पितरों को जल अर्पित करता है, उसे पुरुषमेधयज्ञ का फल प्राप्त होता है। 32-33॥ | mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मतंगवापी तीर्थ में स्नान करता है, वह एक ही रात्रि में सिद्धि प्राप्त कर लेता है। जो अनलम्ब, अंधक और सनातन तीर्थ में स्नान करके नैमिषारण्य नामक स्वर्ग में स्नान करके इन्द्रियों का संयम करके एक मास तक पितरों को जल अर्पित करता है, उसे पुरुषमेधयज्ञ का फल प्राप्त होता है। 32-33॥
One who takes bath in Matangvapi Tirtha, attains Siddhi in one night. The one who takes a dip in Analamba, Andhak and Sanatan Tirtha and after taking bath in the heavenly place of Naimisharanya and with restraint of senses, offers water to the ancestors for a month, he gets the result of Purushamedhayagya. 32-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥