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mahabharat 13.27.3: भीष्म बोले, "हे पराक्रमी राजन! पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने तीर्थसमुदाय का वर्णन किया था। उसे सुनने में ही तुम्हारा कल्याण है। इससे तुम्हें उत्तम धर्म की प्राप्ति होगी।"   |   mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.27.3 
भीष्म उवाच
इममङ्गिरसा प्रोक्तं तीर्थवंशं महाद्युते।
श्रोतुमर्हसि भद्रं ते प्राप्स्यसे धर्ममुत्तमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे पराक्रमी राजन! पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने तीर्थसमुदाय का वर्णन किया था। उसे सुनने में ही तुम्हारा कल्याण है। इससे तुम्हें उत्तम धर्म की प्राप्ति होगी।"
 
Bhishma said, "O mighty king! In the past, the sage Angira had described the Tirtha Samudaya. It is for your good that you should listen to it. This will help you attain the best religion."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)