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श्लोक 13.27.22  |
महागङ्गामुपस्पृश्य कृत्तिकाङ्गारके तथा।
पक्षमेकं निराहार: स्वर्गमाप्नोति निर्मल:॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य महागंगा और कृतिकांगारक तीर्थ में स्नान करके एक दिन उपवास रखता है, वह पापरहित होकर स्वर्ग को जाता है ॥22॥ |
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| A person who remains fast for a day after taking bath in Mahaganga and Kritikangarak pilgrimage goes to heaven without any sin. 22॥ |
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