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mahabharat 13.27.16-17h: जो मनुष्य सप्तगंगा, त्रिगंगा और इन्द्रमार्ग में अपने पितरों का तर्पण करता है, यदि उसका पुनर्जन्म होता है, तो उसे अमृत भोजन प्राप्त होता है (अर्थात् वह देवता हो जाता है)। 16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  13.27.16-17h 
सप्तगङ्गे त्रिगङ्गे च इन्द्रमार्गे च तर्पयन्॥ १६॥
सुधां वै लभते भोक्तुं यो नरो जायते पुन:।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सप्तगंगा, त्रिगंगा और इन्द्रमार्ग में अपने पितरों का तर्पण करता है, यदि उसका पुनर्जन्म होता है, तो उसे अमृत भोजन प्राप्त होता है (अर्थात् वह देवता हो जाता है)। 16 1/2॥
 
If a person who offers offerings to his ancestors in Saptaganga, Triganga and Indramarga takes rebirth, he gets nectar food (that is, he becomes a god). 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)