Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.27.15-16h: उत्तर दिशा में जहाँ भागीरथी गंगा गिरती है और जहाँ उसका उद्गम तीन भागों में विभक्त हो जाता है, वह भगवान महेश्वर का त्रिस्थान तीर्थ है। जो मनुष्य वहाँ एक मास तक उपवास करके स्नान करता है, उसे देवताओं का प्रत्यक्ष दर्शन होता है। ॥15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत्र भागीरथी गङ्गा पतते दिशमुत्तराम्।
महेश्वरस्य त्रिस्थाने यो नरस्त्वभिषिच्यते॥ १५॥
एकमासं निराहार: स पश्यति हि देवता:।
अनुवाद
उत्तर दिशा में जहाँ भागीरथी गंगा गिरती है और जहाँ उसका उद्गम तीन भागों में विभक्त हो जाता है, वह भगवान महेश्वर का त्रिस्थान तीर्थ है। जो मनुष्य वहाँ एक मास तक उपवास करके स्नान करता है, उसे देवताओं का प्रत्यक्ष दर्शन होता है। ॥15 1/2॥
The place where Bhagirathi Ganga falls in the north and its source gets divided into three parts is the Tristhan pilgrimage place of Lord Maheshwar. The person who fasts for a month and takes a bath there, gets a direct darshan of the gods. ॥15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥