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mahabharat 13.25.d1: दिन के प्रथम तीन मुहूर्त प्रातःकाल कहलाते हैं। उस समय में ब्राह्मणों को जप-ध्यान आदि करके व्रत आदि का पालन करना चाहिए, जो उनके लिए लाभदायक हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.25.d1 
(मुहूर्तानां त्रयं पूर्वमह्न: प्रातरिति स्मृतम्।
जपध्यानादिभिस्तस्मिन् विप्रै: कार्यं शुभव्रतम्॥
 
 
अनुवाद
दिन के प्रथम तीन मुहूर्त प्रातःकाल कहलाते हैं। उस समय में ब्राह्मणों को जप-ध्यान आदि करके व्रत आदि का पालन करना चाहिए, जो उनके लिए लाभदायक हैं।
 
The first three muhurats of the day are called morning. In that time, Brahmins should observe fasts etc. which are beneficial for themselves by chanting and meditating etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)