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mahabharat 13.25.93: जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में करके माता-पिता की सेवा करते हैं और अपने भाइयों से प्रेम करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 93॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  13.25.93 
मातरं पितरं चैव शुश्रूषन्ति जितेन्द्रिया:।
भ्रातॄणां चैव सस्नेहास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में करके माता-पिता की सेवा करते हैं और अपने भाइयों से प्रेम करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 93॥
 
Those who, having controlled their senses, serve their parents and love their brothers, go to heaven. ॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)