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mahabharat 13.25.9: नरश्रेष्ठ! जो तीनों वर्णों के लोग वैदिक मन्त्रों और कर्मकाण्डों से रहित श्राद्ध का भोजन करते हैं, वे राक्षसों के भागी माने जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.9 
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं यच्छ्राद्धं परिविष्यते।
त्रिभिर्वर्णैर्नरश्रेष्ठ तं भागं रक्षसां विदु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! जो तीनों वर्णों के लोग वैदिक मन्त्रों और कर्मकाण्डों से रहित श्राद्ध का भोजन करते हैं, वे राक्षसों के भागी माने जाते हैं।
 
Narashrestha! People of all three castes who serve Shraddha food devoid of Vedic mantras and its rituals are considered to be the part of demons. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)