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mahabharat 13.25.87: जिनके प्रयत्नों से मनुष्य भय, पाप, विघ्न, दरिद्रता और रोगों से होने वाले दुःख से मुक्त हो जाते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं। 87.   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  13.25.87 
भयात्पापात्तथा बाधाद् दारिद्रॺाद् व्याधिधर्षणात्।
यत्कृते प्रतिमुच्यन्ते ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
जिनके प्रयत्नों से मनुष्य भय, पाप, विघ्न, दरिद्रता और रोगों से होने वाले दुःख से मुक्त हो जाते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं। 87.
 
Those by whose efforts people are relieved from fear, sin, obstacles, poverty and pain caused by diseases, go to heaven. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)