Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.81: जो लोग क्षमाशील, इन्द्रियों को वश में रखने वाले तथा अपना काम पूरा हो जाने पर भी बहुत समय तक उनके पास रहने वाले विद्वान पुरुषों को त्याग देते हैं, वे नरक में जाते हैं ॥ 81॥ | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षान्तान् दान्तांस्तथा प्राज्ञान् दीर्घकालं सहोषितान्।
त्यजन्ति कृतकृत्या ये ते वै निरयगामिन:॥ ८१॥
अनुवाद
जो लोग क्षमाशील, इन्द्रियों को वश में रखने वाले तथा अपना काम पूरा हो जाने पर भी बहुत समय तक उनके पास रहने वाले विद्वान पुरुषों को त्याग देते हैं, वे नरक में जाते हैं ॥ 81॥
Those who abandon the learned men who are forgiving, have controlled their senses and have stayed with them for a long time after their work is done, go to hell. ॥ 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥