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mahabharat 13.25.80: जो राजा होकर भी अपनी प्रजा की रक्षा नहीं करते तथा अपनी आय का छठा भाग कर के रूप में हड़प लेते हैं, तथा जो सामर्थ्यवान होकर भी दान नहीं देते, वे भी निस्संदेह नरक में जाते हैं। 80.   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  13.25.80 
अगोप्तारश्च राजानो बलिषड्भागतस्करा:।
समर्थाश्चाप्यदातारस्ते वै निरयगामिन:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जो राजा होकर भी अपनी प्रजा की रक्षा नहीं करते तथा अपनी आय का छठा भाग कर के रूप में हड़प लेते हैं, तथा जो सामर्थ्यवान होकर भी दान नहीं देते, वे भी निस्संदेह नरक में जाते हैं। 80.
 
Those who, despite being kings, do not protect their subjects and usurp one-sixth of their income in the form of taxes, and those who, despite being capable, do not give charity, will also undoubtedly go to hell. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)