Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.25.73: जो मनुष्य चारों आश्रमों और वेदों की सीमा से बाहर हैं तथा शास्त्रविरुद्ध कर्म करके जीविका चलाते हैं, वे अवश्य ही नरक में गिरेंगे। 73.   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.25.73 
चातुराश्रम्यबाह्याश्च श्रुतिबाह्याश्च ये नरा:।
विकर्मभिश्च जीवन्ति ते वै निरयगामिन:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य चारों आश्रमों और वेदों की सीमा से बाहर हैं तथा शास्त्रविरुद्ध कर्म करके जीविका चलाते हैं, वे अवश्य ही नरक में गिरेंगे। 73.
 
Those men who are outside the limits of the four ashrams and the Vedas and earn their living by doing activities that are against the scriptures will definitely fall into hell. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)