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mahabharat 13.25.72: जो लोग वेदों को बेचते हैं, वेदों की निंदा करते हैं और वेदों के मन्त्रों को बेचने के उद्देश्य से लिखते हैं, वे भी अवश्य ही नरक में जाते हैं। 72.   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.25.72 
वेदविक्रयिणश्चैव वेदानां चैव दूषका:।
वेदानां लेखकाश्चैव ते वै निरयगामिन:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जो लोग वेदों को बेचते हैं, वेदों की निंदा करते हैं और वेदों के मन्त्रों को बेचने के उद्देश्य से लिखते हैं, वे भी अवश्य ही नरक में जाते हैं। 72.
 
Those who sell the Vedas, criticise the Vedas and write the mantras of the Vedas for the purpose of sale, they too certainly go to hell. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)