Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.65: हे भारतनन्दन! जो लोग दूसरों की जीविका नष्ट करते हैं, घर उजाड़ते हैं, पति-पत्नी में अलगाव उत्पन्न करते हैं, मित्रों में कलह उत्पन्न करते हैं और किसी की आशाओं को नष्ट करते हैं, वे अवश्य ही नरक में जाते हैं।।65।। | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृत्तिच्छेदं गृहच्छेदं दारच्छेदं च भारत।
मित्रच्छेदं तथाऽऽशायास्ते वै निरयगामिन:॥ ६५॥
अनुवाद
हे भारतनन्दन! जो लोग दूसरों की जीविका नष्ट करते हैं, घर उजाड़ते हैं, पति-पत्नी में अलगाव उत्पन्न करते हैं, मित्रों में कलह उत्पन्न करते हैं और किसी की आशाओं को नष्ट करते हैं, वे अवश्य ही नरक में जाते हैं।।65।।
Bharatanandan! Those who destroy the livelihood of others, ruin homes, cause separation between husband and wife, create conflict among friends and destroy someone's hopes, they definitely go to hell. 65.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥