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mahabharat 13.25.59: भरतश्रेष्ठ! दान देने से किसे महान फल मिलता है, यह विषय मैंने तुमसे कहा है। अब उन कर्मों को सुनो जिनसे मनुष्य नरक या स्वर्ग में जाते हैं। 59॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.25.59 
महाफलविधिर्दाने श्रुतस्ते भरतर्षभ।
निरयं येन गच्छन्ति स्वर्गं चैव हि तत् शृणु॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! दान देने से किसे महान फल मिलता है, यह विषय मैंने तुमसे कहा है। अब उन कर्मों को सुनो जिनसे मनुष्य नरक या स्वर्ग में जाते हैं। 59॥
 
Bharatshrestha! I have told you this topic about whom one gets great rewards by giving donations. Now listen to the deeds by which people go to hell or heaven. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)