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mahabharat 13.25.52: युधिष्ठिर! जो भिखारी चोर और शत्रुओं के भय से यहाँ आते हैं तथा केवल भोजन की इच्छा रखते हैं, उन्हें दान देने से महान फल की प्राप्ति होती है ॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.25.52 
तस्करेभ्य: परेभ्यो वा ये भयार्ता युधिष्ठिर।
अर्थिनो भोक्तुमिच्छन्ति तेषु दत्तं महाफलम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो भिखारी चोर और शत्रुओं के भय से यहाँ आते हैं तथा केवल भोजन की इच्छा रखते हैं, उन्हें दान देने से महान फल की प्राप्ति होती है ॥ 52॥
 
Yudhishthira! Giving alms to those beggars who come here in fear of thieves and enemies and who only want food, brings great results. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)