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mahabharat 13.25.49: भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जिस प्रकार किसान वर्षा की प्रतीक्षा करता है, उसी प्रकार तुम उन गरीब ब्राह्मणों को भोजन कराओ जिनकी पत्नियाँ अपने पतियों के भोजन करने के बाद बचे हुए भोजन की प्रतीक्षा करती हैं (अर्थात जिनके घरों में पके हुए भोजन के अलावा अन्य कोई भोजन नहीं होता)।"   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.49 
भीष्म उवाच
येषां दारा: प्रतीक्षन्ते सुवृष्टिमिव कर्षका:।
उच्छेषपरिशेषं हि तान् भोजय युधिष्ठिर॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जिस प्रकार किसान वर्षा की प्रतीक्षा करता है, उसी प्रकार तुम उन गरीब ब्राह्मणों को भोजन कराओ जिनकी पत्नियाँ अपने पतियों के भोजन करने के बाद बचे हुए भोजन की प्रतीक्षा करती हैं (अर्थात जिनके घरों में पके हुए भोजन के अलावा अन्य कोई भोजन नहीं होता)।"
 
Bhishma said, "Yudhishthira! Just as a farmer waits for the rain, similarly you must feed those poor Brahmins whose wives wait for the leftover food after their husbands have eaten (i.e. in whose houses there is no storage of food other than what is cooked)."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)