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mahabharat 13.25.40: युधिष्ठिर! उपनयन के समय ब्राह्मणों को मुंजकी, क्षत्रियों को प्रत्यंचा तथा वैश्यों को शणकी धारण करना चाहिए। यही धर्म है. 40॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.25.40 
विप्रस्य रशना मौञ्जी मौर्वी राजन्यगामिनी।
बाल्वजी ह्येव वैश्यस्य धर्म एष युधिष्ठिर॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! उपनयन के समय ब्राह्मणों को मुंजकी, क्षत्रियों को प्रत्यंचा तथा वैश्यों को शणकी धारण करना चाहिए। यही धर्म है. 40॥
 
Yudhisthira! At the time of Upanayana, Brahmins should wear Munjaki, Kshatriyas should wear Pratyancha and Vaishyas should wear Shanaki. This is religion. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)