Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.37: इसी प्रकार जब ब्राह्मण के घर किसी देवता का श्राद्ध हो, तो ॐकार के साथ 'पुण्यहम्' जपने का नियम है (अर्थात् 'पुण्यहम् भवन्तो ब्रुवन्तु - 'पुण्यहम्' जपना चाहिए), जब यजमान ऐसा कहे, तो ब्राह्मणों को चाहिए कि 'ॐ पुण्यहम् ॐ पुण्यहम्' कहें। यही वाक्य क्षत्रिय को बिना ॐकार के उच्चारण करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार जब ब्राह्मण के घर किसी देवता का श्राद्ध हो, तो ॐकार के साथ 'पुण्यहम्' जपने का नियम है (अर्थात् 'पुण्यहम् भवन्तो ब्रुवन्तु - 'पुण्यहम्' जपना चाहिए), जब यजमान ऐसा कहे, तो ब्राह्मणों को चाहिए कि 'ॐ पुण्यहम् ॐ पुण्यहम्' कहें। यही वाक्य क्षत्रिय को बिना ॐकार के उच्चारण करना चाहिए।
Similarly, when a deity is performed at a Brahmin's house, then there is a rule of reciting 'punyaham' along with 'Omkar' (i.e. 'punyaham bhavanto bruvantu - you should recite 'punyaham'), when the host says this, the Brahmins should say 'om punyaham om punyaham'. This same sentence should be pronounced by a Kshatriya without Omkar.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥