Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.33: भारतश्रेष्ठ! जो ब्राह्मण श्राद्ध के अंत में 'तथास्तु स्वधा' आदि तात्कालिक शब्दों का प्रयोग नहीं करता, उसे झूठी शपथ लेने का पाप लगता है। | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रियमाणेऽपवर्गे च यो द्विजो भरतर्षभ।
न व्याहरति यद्युक्तं तस्याधर्मो गवानृतम्॥ ३३॥
अनुवाद
भारतश्रेष्ठ! जो ब्राह्मण श्राद्ध के अंत में 'तथास्तु स्वधा' आदि तात्कालिक शब्दों का प्रयोग नहीं करता, उसे झूठी शपथ लेने का पाप लगता है।
Bharatshrestha! The Brahmin who does not use the immediate words like 'Aastu Swadha' etc. at the end of Shraddha is considered to have committed the sin of taking a false oath.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥