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mahabharat 13.25.32: जो धन वेद बेचकर, स्त्री की कमाई से अथवा दीनता दिखाकर लोगों से भिक्षा मांगकर प्राप्त किया गया हो, वह श्राद्ध में ब्राह्मणों को देने योग्य नहीं है ॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.25.32 
ब्रह्मविक्रयनिर्दिष्टं स्त्रिया यच्चार्जितं धनम्।
अदेयं पितृविप्रेभ्यो यच्च क्लैब्यादुपार्जितम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो धन वेद बेचकर, स्त्री की कमाई से अथवा दीनता दिखाकर लोगों से भिक्षा मांगकर प्राप्त किया गया हो, वह श्राद्ध में ब्राह्मणों को देने योग्य नहीं है ॥ 32॥
 
Wealth which is obtained by selling the Vedas or by a woman's earnings or by begging from people by showing humility is not suitable to be given to Brahmins in Shraddha. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)