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अनुयोक्ता च यो विप्रो अनुयुक्तश्च भारत।
नार्हतस्तावपि श्राद्धं ब्रह्मविक्रयिणौ हि तौ॥ १७॥
अनुवाद
भरतनन्दन! जो ब्राह्मण वेतन लेकर पढ़ाता है और जो वेतन लेकर पढ़ता है, वे दोनों ही वेदों के विक्रेता हैं; इसलिए वे श्राद्ध में सम्मिलित होने के योग्य नहीं हैं॥17॥
Bharatanandan! The Brahmin who teaches for a salary and the one who studies for a salary, both are sellers of the Vedas; hence they are not worthy of being included in the Shraddha.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥