Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.24.8: युधिष्ठिर ने पूछा - चाहे वह पराया हो, विद्वान हो, सम्बन्धी हो, तपस्वी हो या यज्ञ करने वाला हो, इनमें से कौन, यदि वह किस प्रकार के गुणों से युक्त हो, तो श्राद्ध और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ पात्र हो सकता है? 8॥ | mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वोऽप्यथवा विद्वान् सम्बन्धी वा यथा भवेत्।
तपस्वी यज्ञशीलो वा कथं पात्रं भवेत् तु स:॥ ८॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - चाहे वह पराया हो, विद्वान हो, सम्बन्धी हो, तपस्वी हो या यज्ञ करने वाला हो, इनमें से कौन, यदि वह किस प्रकार के गुणों से युक्त हो, तो श्राद्ध और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ पात्र हो सकता है? 8॥
Yudhishthir asked - Be it a stranger, a scholar, a relative, an ascetic or a devotee of sacrifice, which of these, if he is endowed with what kind of qualities, can be the best candidate for Shraddha and charity? 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥