Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.24.35: जो निःस्वार्थ, शुद्ध, विद्वान, विनयशील, सत्यनिष्ठ और अपने कर्तव्यपालन करने वाले हैं, उन्हें दिया गया दान भी बहुत फलदायी होता है ॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.24.35 
अलुब्धा: शुचयो वैद्या ह्रीमन्त: सत्यवादिन:।
स्वकर्मनिरता ये च तेभ्यो दत्तं महाफलम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो निःस्वार्थ, शुद्ध, विद्वान, विनयशील, सत्यनिष्ठ और अपने कर्तव्यपालन करने वाले हैं, उन्हें दिया गया दान भी बहुत फलदायी होता है ॥ 35॥
 
Charity given to those who are selfless, pure, learned, modest, truthful and obedient to their duties, is also very fruitful. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)